तुम्हारे लिए मेरे खत

मेरे लिए तुम्हारे खत मैने आज भी संभाल कर रखे हुए है
मैने कभी वो तुम्हे दिए ही नही
मेरे वो अल्फाज़ जो मैने तुम्हारे लिए पिरोए थे
तुम्हे कभी दिखाएं भी नही मैने
अपने एहसासों को मैने उसमें उतार दिया था
पर तुमको वो भी नहीं दिखाई मैने
तुम्हारे लिए लिखे वो खत बार बार पढ़ लेती हू
जो कह नही पाती वो लम्हा पढ़ कर जी लेती हू
तुम से प्यार करतीं हू तुम्हारे बिना ही
तुम जब भी मिलते हो नया सा तोहता दिए जाते हो
एक एहसास का मोती मेरी माला में जोड़ जाते हो
तुम मेरे ना होकर भी सिर्फ मेरे ही रहते हो
दूर हो कर भी बहुत करीब रहते ही

💞तुम्हारी अनुराधा💞


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